ग्रंथसार
क्या कभी ऐसा हुआ है कि जिस चीज़ को पाने की बहुत इच्छा थी, वो मिल गई, और मिलते ही मन किसी दूसरी चीज़ के पीछे भागने लगा?
आज का चिंतन · पाठ 4
संतोष एक निर्णय है