ग्रंथसार
एक झूठ को सँभालने के लिए हमें कितने और झूठों का जाल बुनना पड़ता है, और उस जाल को याद रखने में मन की कितनी शक्ति व्यर्थ हो जाती है।
आज का चिंतन · पाठ 5
सत्य की सरलता