ग्रंथसार
एक छोटा सा पौधा भी जब हम लगाते हैं, तो उसे सींचते हैं, पर यह आशा नहीं करते कि वह कल ही हमें फल देने लगे।
आज का चिंतन · पाठ 54
संबंध