ग्रंथसार
दो अपरिचित धनुर्धारियों के सामने हनुमान जी ने ऐसी कौन-सी बात रखी कि बातचीत का रास्ता खुल गया?
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 10
मधुरता से पहला परिचय