ग्रंथसार
सामने वाला आपकी बात सुनने के बजाय आपको दबाने लगे, तो अपनी मर्यादा बचाते हुए दृढ़ कैसे रहा जाए?
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 11
निर्भीक किंतु मर्यादित