ग्रंथसार
बरसों बाद मिलने आए मित्र की पोटली छोटी थी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत उस पोटली को देखकर नहीं बदला।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 14
दूरी से परे अपनापन