ग्रंथसार
विवाह की तैयारियों के बीच रुक्मिणी ने अपनी इच्छा को चुप होने नहीं दिया, बल्कि उसे एक सोच-समझकर उठाया गया कदम बनाया।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 19
रुक्मिणी का स्वनिर्णय