ग्रंथसार
घर में सब कुछ ठीक दिखाई दे, तब भी किसी माँ के मन में एक ऐसी बात रह सकती है जिसे उसने बरसों से किसी से नहीं कहा।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 23
माँ की अधूरी अभिलाषा