ग्रंथसार
जब भूखे ग्वालबालों की बात यज्ञ में लगे लोगों ने नहीं सुनी, तब कुछ स्त्रियों ने पहचान लिया कि उस समय उनका धर्म क्या था।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 29
अन्न का अनमोल रत्न