ग्रंथसार
जब सम्मान की आदत पड़ जाए, तो किसी का अलग निर्णय भी अपमान क्यों लगने लगता है?
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 30
इन्द्र का झुकता अभिमान