ग्रंथसार
खतरा सामने हो तो साहस केवल उससे भिड़ने में नहीं, सबके लिए सुरक्षित रास्ता बनाने में भी होता है।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 31
भय के सामने सजगता