ग्रंथसार
जब विरोधी का हथियार छूट जाए, तब अपने भीतर उठते आवेग को रोक पाना भी शक्ति की एक परीक्षा है।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 34
विजय में भी संयम