ग्रंथसार
विभीषण रावण के भाई थे, लेकिन क्या उनका परिचय ही उनके विरुद्ध अंतिम निर्णय बन जाना चाहिए था?
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 35
शरणागत की निष्पक्ष परख