ग्रंथसार
एक असहाय हिरण के बच्चे को बचाना करुणा थी, फिर वही स्नेह राजा भरत के मन का बंधन कैसे बन गया?
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 38
स्नेह रहे, संतुलन भी