ग्रंथसार
कंस का अंत हो गया था, लेकिन मथुरा को केवल अत्याचार से मुक्ति नहीं, फिर से भरोसे के साथ जीने की व्यवस्था भी चाहिए थी।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 41
सत्ता का पुनर्स्थापन