ग्रंथसार
गंगा जी के आने की सहमति मिल गई थी, फिर भी भगीरथ का काम पूरा नहीं हुआ था—अब प्रश्न था कि उनके वेग को सँभालेगा कौन?
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 43
भगीरथ का दीर्घ प्रयत्न