ग्रंथसार
जिस बेटी के लिए राजा ककुद्मी योग्य वर पूछने गए थे, लौटने तक उसके लिए सोचे गए सारे संबंध बीते युगों की बात हो चुके थे।
चाणक्य नीति — कथाओं के साथ · पाठ 45
ककुद्मी और बदलता समय