ग्रंथसार
कभी बच्चे की ज़िद के पीछे बस इतना-सा सवाल होता है—क्या इस घर में मेरे लिए भी उतनी ही जगह है?
घर-परिवार — रिश्तों की कथाएँ · पाठ 7
ध्रुव की चोट