ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस विशाल मैदान में दोनों सेनाएं आमने-सामने खड़ी थीं, युद्ध का शंखनाद गूँज चुका था।
गीता के जीवन सूत्र · पाठ 1
कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो