ग्रंथसार
वे प्रभु जो समस्त कारणों के भी परम कारण हैं, और जो नित्य आनंद के स्वरूप हैं।
नाम में छिपा ज्ञान · पाठ 2
श्रीविष्णु के सहस्र नाम — भाग 2