ग्रंथसार
जिस सुबह को हम अपना अधिकार समझकर जल्दी में पार कर जाते हैं, क्या आज उसे एक उपहार की तरह ग्रहण कर सकते हैं?
प्रातः श्रवण — जागने के बाद सुनें · पाठ 1
आज का उपहार