ग्रंथसार
कुंती ने बीते संकटों को याद किया, तो केवल पीड़ा नहीं देखी—उन्हें वह सहारा भी याद आया, जिसने उन्हें टूटकर बिखरने नहीं दिया।
प्रातः श्रवण — जागने के बाद सुनें · पाठ 2
कृतज्ञता की दृष्टि