ग्रंथसार
एक छोटे बालक ने ऋषियों के पास बैठकर जो सुना, वही माँ के बिछुड़ जाने के बाद उसकी यात्रा का सहारा बना।
प्रातः श्रवण — जागने के बाद सुनें · पाठ 8
सुनने से खुला पथ