ग्रंथसार
अयोध्या नगरी उत्सव में डूबी थी, पर किसी को क्या पता था कि यही उत्सव की रात, एक गहरे विषाद की सुबह लेकर आएगी।
रामायण से जीवन की सीख · पाठ 1
वचन का मान