ग्रंथसार
कभी-कभी प्रेम का सबसे कोमल रूप कुछ देना नहीं, बल्कि सामने वाले की इच्छा समझकर उसके पास बने रहना होता है।
शयन से पहले — सोने से पहले सुनें · पाठ 1
निषादराज का स्नेह