ग्रंथसार
चित्रकूट में बनी एक पर्णकुटी हमें घर का वह अर्थ याद दिलाती है, जो सामान से नहीं, साथ और आदर से बनता है।
शयन से पहले — सोने से पहले सुनें · पाठ 3
चित्रकूट में अपना घर