ग्रंथसार
भरत जी श्रीराम की पादुकाएँ लेकर लौटे, तो उनके पास केवल एक स्मृति नहीं, अपना कर्तव्य निभाने का एक शांत आधार था।
शयन से पहले — सोने से पहले सुनें · पाठ 4
पादुकाओं में भरोसा