ग्रंथसार
शबरी की प्रतीक्षा उस दिन पूरी हुई, जब उनके आश्रम में भगवान श्रीराम आए और वन से जुटाया गया साधारण आहार भी सेवा का अवसर बन गया।
शयन से पहले — सोने से पहले सुनें · पाठ 6
शबरी की पूर्ण प्रतीक्षा