ग्रंथसार
जिस आगमन की बात शबरी ने अपने गुरुओं से सुनी थी, वह जब सच हुआ, तो उनके पास स्वागत के लिए वन के फल और बरसों से सँभाला हुआ विश्वास था।
उदास हो तो ये सुनें · पाठ 4
प्रतीक्षा भी सुनी जाती है