ग्रंथसार
हस्तिनापुर के राजभवन में रात्रि गहरा रही थी, पर महाराज धृतराष्ट्र की आँखों में नींद नहीं थी।
विदुर नीति के मोती · पाठ 2
पण्डित किसे कहते हैं