ग्रंथसार
हस्तिनापुर के राजमहल में रात्रि का सन्नाटा गहरा रहा था, पर महाराज धृतराष्ट्र की आँखों में नींद नहीं थी, और उनका हृदय किसी अनजाने भय से जल रहा था।
विदुर नीति के मोती · पाठ 3
तीन महाविनाशक