ग्रंथसार
महात्मा विदुर की वाणी उस शांत रात्रि में गूँज रही थी, और महाराज धृतराष्ट्र का व्याकुल मन शब्दों के उस अमृत से शांति की एक-एक बूँद खोज रहा था।
विदुर नीति के मोती · पाठ 5
सच्चा मित्र और सलाहकार