ग्रंथसार
अग्नि देव वसिष्ठ को बताते हैं कि घर की नींव रखना मात्र ईंट-पत्थर का मेल नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को एक स्थान पर संजोने की कला है।
अग्नि पुराण · अध्याय 42
वास्तुशास्त्र और भवन निर्माण