ग्रंथसार
आत्मा न तो कभी जन्म लेती है और न ही कभी मरती है, वह शाश्वत और अपरिवर्तनीय है।
अग्नि पुराण · अध्याय 59
आत्मा का स्वरूप और पुनर्जन्म