ग्रंथसार
शाप को सत्य स्वीकार कर राजा परीक्षित ने मृत्यु के आने से पूर्व प्रभु के चरणों में जाने का निर्णय लिया।
भागवत पुराण · अध्याय 24
वैराग्य और संकल्प