ग्रंथसार
असुर कुल में जन्म लेकर भी जिसने अपने हृदय में केवल श्रीहरि को बसाया, उस भक्त शिरोमणि प्रह्लाद की गाथा युगों-युगों तक भक्तों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
भागवत पुराण · अध्याय 56
प्रह्लाद की भक्ति