ग्रंथसार
ब्रह्म पर्व के अंतर्गत सूर्य देव की प्रसन्नता हेतु किए जाने वाले व्रतों का विस्तार से वर्णन है।
भविष्य पुराण · अध्याय 33
सौर व्रतों का विधान