ग्रंथसार
यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देना नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन और देवताओं के प्रति कृतज्ञता का मार्ग है।
भविष्य पुराण · अध्याय 6
यज्ञों का महत्व