ग्रंथसार
समय का चक्र निरंतर घूमता है, जिसमें सत्ययुग की पवित्रता से लेकर कलियुग की चुनौतियों तक का सफर वर्णित है।
भविष्य पुराण · अध्याय 7
चार युगों का विधान