ग्रंथसार
ब्रह्मांड के रक्षक के रूप में खड़े ये विशाल पर्वत न केवल पृथ्वी का आधार हैं, बल्कि देवताओं के क्रीड़ा-स्थल भी हैं।
ब्रह्म पुराण · अध्याय 11
पर्वतों का वर्गीकरण और महत्त्व