ग्रंथसार
भगवान सूर्य इस समस्त ब्रह्मांड के आत्मा हैं, जिनके प्रकाश से ही सृष्टि का जीवन स्पंदित होता है।
ब्रह्म पुराण · अध्याय 20
सूर्य देव की महिमा और ग्रहों की स्थिति