ग्रंथसार
आकाश में भ्रमण करते हुए ग्रहों की यह अद्भुत चाल ही काल और सृष्टि के चक्र को निरंतर गति प्रदान करती है।
ब्रह्म पुराण · अध्याय 21
ग्रहों की गति और स्थिति