ग्रंथसार
श्रीक्षेत्र की पावन भूमि पर पग-पग पर अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
ब्रह्म पुराण · अध्याय 57
तीर्थ यात्रा का पुण्य फल