ग्रंथसार
ब्रह्मांड के इस विशाल वितान में समय का पहिया कभी नहीं रुकता, जो सृष्टि के उदय और अंत का साक्षी है।
ब्रह्माण्ड पुराण · अध्याय 53
कालचक्र और युगों का स्वरूप