ग्रंथसार
श्रीचक्र केवल एक ज्यामितीय आकृति नहीं, बल्कि यह स्वयं देवी के निवास स्थान का जीवंत मानचित्र है।
ब्रह्माण्ड पुराण · अध्याय 58
श्रीचक्र का आध्यात्मिक रहस्य