ग्रंथसार
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अंतर्गत प्रकृति के विभिन्न रूपों और उनके महिमामय स्वरूप का दिव्य विवेचन है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण · अध्याय 4
प्रकृति का स्वरूप और महिमा