ग्रंथसार
अहंकार के मद में चूर दक्ष जब महादेव की अवहेलना करता है, तब सती का आत्म-बलिदान और वीरभद्र का रौद्र रूप सामने आता है।
लिङ्ग पुराण · अध्याय 28
दक्ष यज्ञ का विध्वंस