ग्रंथसार
भगवान दत्तात्रेय जी के आगमन के बाद, जैमिनि मुनि के मन में अवधूत की जीवन-शैली को लेकर जिज्ञासा उत्पन्न हुई।
मार्कण्डेय पुराण · अध्याय 31
अवधूत का स्वरूप