ग्रंथसार
पक्षी अब जैमिनी को काल की उस विशाल गणना की ओर ले गए, जहाँ मन्वंतरों के बीतने से युग बदलते हैं।
मार्कण्डेय पुराण · अध्याय 4
काल और मन्वंतरों का चक्र