ग्रंथसार
दुख की पराकाष्ठा पर भी सत्य का संकल्प न छोड़ना ही सबसे बड़ा पुण्य है।
मार्कण्डेय पुराण · अध्याय 42
सत्य की अंतिम परीक्षा